कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना १११ / १६३ № 111 of 163 रचना १११ / १६३
१३ जुलाई २०१५ 13 July 2015 १३ जुलाई २०१५

सावन बरसा गाँव हमारे saawan barasaa gaanv hamaare सावन बरसा गाँव हमारे

सावन बरसा, गाँव हमारे

सुन लो क्या-क्या

रंग

दिखाए।

रस्सी पर थे वस्त्र

ओट में

घिरे अचानक

श्याम-घन घने।

संग हवा जब जल भर

लाई

कूदे भू पर लगे

लोटने।

अहा, नज़ारा क्या आँगन का!

तैर-तैर जब खूब

नहाए।

गलियों का भी सुन

लो फंडा

मौसम था मनभावन

ठंडा।

भीगे बालक, सिहरे भागे

छोड़ खेलना

गिल्ली-डंडा।

मन-भर मिट्टी पहन,

saawan barasaa, gaanv hamaare

·

sun lo kyaa-kyaa

rang

·

dikhaae

·

rassee par the wastr

ot men

·

ghire achaanak

shyaam-ghan ghane

·

sang hawaa jab jal bhar

laaee

·

koode bhoo par lage

lotane

·

ahaa, nazaaraa kyaa aangan kaa!

·

tair-tair jab khoob

·

nahaae

·

galiyon kaa bhee sun

lo phandaa

·

mausam thaa manabhaawan

thandaa

·

bheege baalak, sihare bhaage

·

chod khelanaa

gillee-dandaa

·

man-bhar mittee pahan,

सावन बरसा, गाँव हमारे

सुन लो क्या-क्या

रंग

दिखाए।

रस्सी पर थे वस्त्र

ओट में

घिरे अचानक

श्याम-घन घने।

संग हवा जब जल भर

लाई

कूदे भू पर लगे

लोटने।

अहा, नज़ारा क्या आँगन का!

तैर-तैर जब खूब

नहाए।

गलियों का भी सुन

लो फंडा

मौसम था मनभावन

ठंडा।

भीगे बालक, सिहरे भागे

छोड़ खेलना

गिल्ली-डंडा।

मन-भर मिट्टी पहन,

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗