तीसरा रंग /लघुकथा teesaraa rang /laghukathaa तीसरा रंग /लघुकथा
अनाथालय में पली बढ़ी साँवली-सलोनी कजली के तन का रंग जितना काला था, गुणों का रंग उतना ही उजला. ईश्वर ने उसमें गुण कूट-कूट कर भरे थे. इन्हीं गुणों के कारण ही उसके सास-ससुर ने उसे अपने बेटे विनोद के लिए पसंद किया था. उसकी आवारगी और उच्चश्रंखलता के कारण कोई भला इंसान अपनी बेटी उसके साथ ब्याहना पसंद नहीं करता था। विनोद कजली को बेहद प्यार करता था लेकिन केवल रात के समय, दिन में वो
anaathaalay men palee bढ़ee saanvalee-salonee kajalee ke tan kaa rang jitanaa kaalaa thaa, gunon kaa rang utanaa hee ujalaa eeshvar ne usamen gun koot-koot kar bhare the inheen gunon ke kaaran hee usake saas-sasur ne use apane bete winod ke lie pasand kiyaa thaa usakee aawaaragee aur uchchashrankhalataa ke kaaran koee bhalaa insaan apanee betee usake saath byaahanaa pasand naheen karataa thaa winod kajalee ko behad pyaar karataa thaa lekin kewal raat ke samay, din men wo
अनाथालय में पली बढ़ी साँवली-सलोनी कजली के तन का रंग जितना काला था, गुणों का रंग उतना ही उजला. ईश्वर ने उसमें गुण कूट-कूट कर भरे थे. इन्हीं गुणों के कारण ही उसके सास-ससुर ने उसे अपने बेटे विनोद के लिए पसंद किया था. उसकी आवारगी और उच्चश्रंखलता के कारण कोई भला इंसान अपनी बेटी उसके साथ ब्याहना पसंद नहीं करता था। विनोद कजली को बेहद प्यार करता था लेकिन केवल रात के समय, दिन में वो