कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी दोहा Doha दोहो · रचना ६२ / ६५ № 62 of 65 रचना ६२ / ६५
२५ अक्तूबर २०१९ 25 October 2019 २५ अक्तूबर २०१९

दीप-लक्ष्मी दो हमें deep-lakshmee do hamen दीप-लक्ष्मी दो हमें

दोहा गीत

दीप-लक्षमी दो हमें, ऐसा अन्तर्ज्ञान।

तिमिर विश्व का दूर कर, फैलाएँ सदज्ञान।

युग युग से जलते रहे, दीप हमारे द्वार

माँ तुम आकर मेट दो, अंतरतम इस बार।

राह दिखाओ माँ हमें, बढ़ें कदम जिस ओर

दीपक प्रेम, प्रकाश के, जगमग हों उसछोर।

जहाँ अँधेरे घोर हों, मायूसी दिन रात

बन प्रकाश जाना वहाँ, दीवाली की रात।

जन कल्याणी काट दो, जन जन मन का क्लेश

रिद्धि, सिद्धि, सुख सम्पदा का हो बहुल प्रवेश।

dohaa geet

·

deep-lakshamee do hamen, aisaa antarjnaan

timir wishv kaa door kar, phailaaen sadajnaan

·

yug yug se jalate rahe, deep hamaare dvaar

maan tum aakar met do, antaratam is baar

·

raah dikhaao maan hamen, bढ़en kadam jis or

deepak prem, prakaash ke, jagamag hon usachor

·

jahaan andhere ghor hon, maayoosee din raat

ban prakaash jaanaa wahaan, deewaalee kee raat

·

jan kalyaanee kaat do, jan jan man kaa klesh

riddhi, siddhi, sukh sampadaa kaa ho bahul prawesh

दोहा गीत

दीप-लक्षमी दो हमें, ऐसा अन्तर्ज्ञान।

तिमिर विश्व का दूर कर, फैलाएँ सदज्ञान।

युग युग से जलते रहे, दीप हमारे द्वार

माँ तुम आकर मेट दो, अंतरतम इस बार।

राह दिखाओ माँ हमें, बढ़ें कदम जिस ओर

दीपक प्रेम, प्रकाश के, जगमग हों उसछोर।

जहाँ अँधेरे घोर हों, मायूसी दिन रात

बन प्रकाश जाना वहाँ, दीवाली की रात।

जन कल्याणी काट दो, जन जन मन का क्लेश

रिद्धि, सिद्धि, सुख सम्पदा का हो बहुल प्रवेश।

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗