दीप-लक्ष्मी दो हमें deep-lakshmee do hamen दीप-लक्ष्मी दो हमें
दोहा गीत
दीप-लक्षमी दो हमें, ऐसा अन्तर्ज्ञान।
तिमिर विश्व का दूर कर, फैलाएँ सदज्ञान।
युग युग से जलते रहे, दीप हमारे द्वार
माँ तुम आकर मेट दो, अंतरतम इस बार।
राह दिखाओ माँ हमें, बढ़ें कदम जिस ओर
दीपक प्रेम, प्रकाश के, जगमग हों उसछोर।
जहाँ अँधेरे घोर हों, मायूसी दिन रात
बन प्रकाश जाना वहाँ, दीवाली की रात।
जन कल्याणी काट दो, जन जन मन का क्लेश
रिद्धि, सिद्धि, सुख सम्पदा का हो बहुल प्रवेश।
dohaa geet
deep-lakshamee do hamen, aisaa antarjnaan
timir wishv kaa door kar, phailaaen sadajnaan
yug yug se jalate rahe, deep hamaare dvaar
maan tum aakar met do, antaratam is baar
raah dikhaao maan hamen, bढ़en kadam jis or
deepak prem, prakaash ke, jagamag hon usachor
jahaan andhere ghor hon, maayoosee din raat
ban prakaash jaanaa wahaan, deewaalee kee raat
jan kalyaanee kaat do, jan jan man kaa klesh
riddhi, siddhi, sukh sampadaa kaa ho bahul prawesh
दोहा गीत
दीप-लक्षमी दो हमें, ऐसा अन्तर्ज्ञान।
तिमिर विश्व का दूर कर, फैलाएँ सदज्ञान।
युग युग से जलते रहे, दीप हमारे द्वार
माँ तुम आकर मेट दो, अंतरतम इस बार।
राह दिखाओ माँ हमें, बढ़ें कदम जिस ओर
दीपक प्रेम, प्रकाश के, जगमग हों उसछोर।
जहाँ अँधेरे घोर हों, मायूसी दिन रात
बन प्रकाश जाना वहाँ, दीवाली की रात।
जन कल्याणी काट दो, जन जन मन का क्लेश
रिद्धि, सिद्धि, सुख सम्पदा का हो बहुल प्रवेश।