कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी दोहा Doha दोहो · रचना ६४ / ६७ № 64 of 67 रचना ६४ / ६७
२५ अक्तूबर २०१९ 25 October 2019 २५ अक्तूबर २०१९

दीप-लक्ष्मी दो हमें deep-lakshmee do hamen दीप-लक्ष्मी दो हमें

दोहा गीत

॥

दीप-लक्षमी दो हमें, ऐसा अन्तर्ज्ञान।

तिमिर विश्व का दूर कर, फैलाएँ सदज्ञान।

॥

युग युग से जलते रहे, दीप हमारे द्वार

माँ तुम आकर मेट दो, अंतरतम इस बार।

॥

राह दिखाओ माँ हमें, बढ़ें कदम जिस ओर

दीपक प्रेम, प्रकाश के, जगमग हों उसछोर।

॥

जहाँ अँधेरे घोर हों, मायूसी दिन रात

बन प्रकाश जाना वहाँ, दीवाली की रात।

॥

जन कल्याणी काट दो, जन जन मन का क्लेश

रिद्धि, सिद्धि, सुख सम्पदा का हो बहुल प्रवेश।

dohaa geet

·

deep-lakshamee do hamen, aisaa antarjnaan

timir wishv kaa door kar, phailaaen sadajnaan

·

yug yug se jalate rahe, deep hamaare dvaar

maan tum aakar met do, antaratam is baar

·

raah dikhaao maan hamen, bढ़en kadam jis or

deepak prem, prakaash ke, jagamag hon usachor

·

jahaan andhere ghor hon, maayoosee din raat

ban prakaash jaanaa wahaan, deewaalee kee raat

·

jan kalyaanee kaat do, jan jan man kaa klesh

riddhi, siddhi, sukh sampadaa kaa ho bahul prawesh

दोहा गीत

॥

दीप-लक्षमी दो हमें, ऐसा अन्तर्ज्ञान।

तिमिर विश्व का दूर कर, फैलाएँ सदज्ञान।

॥

युग युग से जलते रहे, दीप हमारे द्वार

माँ तुम आकर मेट दो, अंतरतम इस बार।

॥

राह दिखाओ माँ हमें, बढ़ें कदम जिस ओर

दीपक प्रेम, प्रकाश के, जगमग हों उसछोर।

॥

जहाँ अँधेरे घोर हों, मायूसी दिन रात

बन प्रकाश जाना वहाँ, दीवाली की रात।

॥

जन कल्याणी काट दो, जन जन मन का क्लेश

रिद्धि, सिद्धि, सुख सम्पदा का हो बहुल प्रवेश।

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗